जल की बूँद-बूँद कीमती है।  *****  स्नान बाल्टी में पानी भरकर करे, फव्वारे से नहीं।  *****  शेव व दंत मंजन मग में पानी भरकर करें, नल लगातार चालू रखकर नहीं।  *****  कपडों की धुलाई बाल्टी में पानी भरकर करें, नल लगातार चालू रखकर नहीं।  *****  वाहन बाल्टी में पानी भरकर साफ करें, नल से पाईप लगाकर नहीं।  *****  पौधे लगे गमलों में पानी मग से डालें, नल में पाइप लगाकर नहीं।  *****  घर के फर्श की धुलाई बाल्टी से पानी डालकर करें, नल में पाइप लगाकर नहीं।  *****  खराब नल से टपकता पानी बंद करने के लिये तुरन्त कार्यवाही करें, आलस नहीं।  *****  जल सम्पदा सीमित है इसका मितव्ययता पूर्वक सदुपयोग करें, अपव्यय नहीं।  *****  जब पानी बिकेगा तोल, तब समझोगे इसका मोल!  *****  बूँद-बूँद पानी, बचाऐ सो ज्ञानी।


 

 

 

 

 


सामान्य जानकारी

राजस्थान परिचय

जहां राजस्थान भारत के सबसे बड़े राज्य होने के गौरव से सम्मानित है वहीं भौगोलिक स्थिति फलस्वरुप इसे सीमित एवं न्यूनतम जलस्त्रोत विरासत में प्राप्त है। इस राज्य का क्षेत्रफल 3.42 लाख वर्ग किलोमीटर है जो देश के क्षेत्रफल का लगभग 10 प्रतिशत है। प्रदेश में उपलब्ध जल स्त्रोत देश के कुल स्त्रोतो के एक प्रतिशत से भी कम है। 

जनगणना 2001 के अनुसार राजस्थान प्रान्त एक नजर में निम्न प्रकार है। 
    
जिलों की संख्या 

33

तहसीलों की संख्या 

241

कुल ग्राम 

41353

आबाद ग्राम

39753

शहर/ कस्बे

222

जनसंख्या कुल

56507188

पुरुष

29420011

महिला 27087177
ग्रामीण जनसंख्या 

43292813

शहरी जनसंख्या  13214375
सैक्स अनुपात प्रान्त 

921

अनुसूचित जाति 

17.2 %

अनुसूचित जनजाति

12.6 %

सैक्स अनुपात अनुसूचित जाति  913
सैक्स अनुपात अनुसूचित जनजाति 944

राजस्थान प्रान्त में सदा बहने वाली नदी चम्बल है जो प्रान्त की सीमा पर निकलती है। प्रान्त का दो तिहाई हिस्सा मरुस्थलीय (थार) है। वर्षा प्रान्त में कई दशाब्दियों से अपर्याप्त /असमय रही है। इन विषम परिस्थितियों के बावजूद प्रान्त की सांस्कृतिक विरासत तथा धरोहर मजबूत एवं विशाल है। यह प्रान्त धार्मिक सहिष्णुता में अग्रणी है। शायद विपरित परिस्थितियों में भी सम्मान के साथ जीवन यापन की लालसा के कारण ही यह स्थिति सामने आई है। 

पेयजल क्षेत्र को प्रान्त में सदा से प्राथमिकता रही है। पूर्व काल मे निर्मित तथा वर्तमान में विद्यमान कूऐं तथा बावडियां उपरोक्त का प्रमाण तो है ही साथ में उनके निमार्ण में की गई कारीगरी सांस्कृतिक धरोहर को भी दर्शाती है।